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समाज की सेवा करने का अवसर हमें अपना ऋण चुकाने का मौका देता है - नरेन्द्र मोदी


                                     कड़ी मेहनत कभी थकान नहीं लाती , वह संतोष लाती है

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देश भक्ति शायरी

सरकार में भ्रष्टाचार का विरोध देशभक्ति के उच्चतम दायित्व है
आपको देशभक्ति में इतना अँधा नहीं हो जाना चाहिए कि आप सच्चाई का सामना न कर सकें। जो गलत है वो गलत है, फिर चाहे कोई कुछ भी कहे।

इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से, अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंक़लाब लिखा जाता है।
यह मत पूछो कि तुम्हारा देश तुम्हारे लिए क्या कर सकता है बल्कि यह पूछो कि तुम देश के लिए क्या कर सकते हो।
आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदि हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है यह मत पूछिये कि आपका देश आपके लिए क्या कर सकता है; यह पूछिये कि आप अपने देश के लिए क्या कर सकते हैं।

देशभक्ति, अपने देश का हर समय समर्थन करना है और अपनी सरकार का, जब वो इसकी हक़दार हो।

देशभक्त कलाम को प्रणाम....

देशभक्त कलाम को प्रणाम....
   हे कलाम... फिर किसी अशिअम्मा जैनुलाब्दीन जैसी माँ की कोख से किसी जैनुलाब्दीन मराकायर पिता के घर में... भारत माँ का गौरव बढाने भारत भूमि पर जल्दी आना.... और ईश्वर से प्रार्थना है उन्हें स्वर्ग में स्थान न दे भारत की भूमि को स्वर्ग बनाने उन्हें फिर से इस भूमि पर भेजे " देशभक्त कलाम को प्रणाम .....

हो समय ने फिर ललकारा है---

हो समय ने फिर ललकारा है---
हो समय ने फिर ललकारा है।
देश धर्म द्रोहियों से लड़ना हमारा नारा है।।स्थाई।।

हम भारत के वासी हमारा राज प्रजातन्त्र है।
वेदों के उपासक हमारी संस्कृति पवित्रा है।
खुद जीयें और जीने दें ऐसा हमारा चरित्र है।
कभी इन्सानियत से हमने रिश्ता तोड़ा नहीं।
सच्चाई कि रास्ते से हमने मुंह मोड़ा नहीं।
जिसने हमको छेड़ा पहले उसको हमने छोड़ा नहीं।
हो जानता यह जग सारा है
बड़े-बड़े खूंखारों का हमने मुंह मारा है।।1।।

देश की अखण्डता को खण्डित नहीं होने देंगे।
आपस में हम फूट के बीज नहीं बोने देंगे।
आजादी रूपी दौलत को हरगिज नहीं खोने देंगे।
 जो करते हैं बकवास आज गैरों के इशारों पर।
लानत है ऐसे देश द्रोही गद्दारों पर ।
करें न विश्वास कभी भूलकर मक्कारों पर।
 हो हुआ दिल दुःखी हमारा है।
ईंट का जवाब देंगे पत्थर से और न चारा है।।2।।

गर पहले हमारे नेता ऐसी गलती खाते ना।
तो आज के ये दिन कभी देखने में आते ना।
मुट्ठी भर ये लोग कभी शोर यों मचाते ना।
हमने इनकी नीयत को अच्छी तरह पहचाना है।
चण्डीगढ़ का फैसला तो झूठा सा बहाना है।
सिर्फ इनका एक खालिस्तान का निशाना है।
हो खास गैरों का इशारा है।
हो खुलमखुल्ला पापिस्तान ये नाच…