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जनता अपनी आस्था और बुद्धि क्यों आसाराम जैसों के पास गिरवी रख देती है?

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उमा भारती ने मध्य प्रदेश में अपने मुख्यमंत्रीकाल में विधानसभा के अंदर आसाराम के प्रवचन कराए थे तो पूरे मंत्रिमंडल के साथ सत्ता पक्ष के सारे विधायकों के लिए उसे सुनना अनिवार्य कर दिया था. भक्तों के बीच आसाराम (फोटो साभार: फेसबुक/आसाराम) जोधपुर में विशेष एससी-एसटी अदालत के जज मधुसूदन शर्मा द्वारा वहां की सेंट्रल जेल में शाहजहांपुर की एक अवयस्क लड़की से बलात्कार के दोषी आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाने से खुश पीड़िता के पिता भले ही यह महसूस करते हुए कि उन्हें इंसाफ मिल गया है, अपनी लड़ाई में साथ देने वालों का शुक्रिया अदा कर रहे और उम्मीद जता रहे हों कि अब मामले के उन गवाहों को भी न्याय मिलेगा, जिनकी हत्या कर दी गई या अपहरण कर लिया गया, लेकिन देश की न्यायप्रणाली में प्रायः नजर आ जाने वाले छिद्रों के मद्देनजर अभी यह नहीं कहा जा सकता कि आसाराम वाकई अपने अंजाम को पहुंच गये हैं या उन्हें ‘करनी का फल’ मिल गया है. अकारण नहीं कि पीड़िता के पिता के बरक्स आसाराम ने सजा सुनाये जाते वक्त हताश-निराश दिखने के बावजूद एक बार भी यह नहीं जताया कि इससे उन्हें अपने अपराध का किंचित भी बोध हुआ है, जबकि उनकी प्रव…

Yogi Adityanath BJP की सारी ढोंगी निकाल दी और Rss वालो को भी नहीं बक्शा...

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पद्मावती विवाद और राजपूत ###########

*पद्मावती विवाद और राजपूत
राजस्‍थान के राजपुतों में भयंकर गरीबी है। शायद जाटों से भी ज्‍यादा। ३० प्रतिशत के आसपास बीपीएल होंगे। काश कि कभी ये रोजगार के लिए सड़कों पर उतरते। पर नहीं, उतरेंगे तो कभी गैंगस्‍टर आनंदपाल के लिए और कभी पद्मावती के लिए।
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लेकिन ये तो आजकल हर जाति में हो रहा है। *हर कोई अस्मिता के लिए सड़कों पर उतर रहा है, मुर्ति के लिए उतर रहा है पर रोजगार के लिए नहीं। इसका मूल कारण कोई एक जाति नहीं बल्कि देश में एक क्रान्तिकारी आन्‍दोलन की अनुपस्थिति है जिसके कारण तमाम प्रतिक्रियावादी जनता को गलत रास्‍ते पर ले जाने में सफल हो रहे हैं।* *शहीदे आजम भगत सिंह* ने कहा था “जब गतिरोध की स्थिति लोगों को अपने शिकंजे में जकड़ लेती है तो किसी भी प्रकार की तब्दीली से वे हिचकिचाते हैं। इस जड़ता और निष्क्रियता को तोड़ने के लिये एक क्रान्तिकारी स्पिरिट पैदा करने की ज़रूरत होती है, अन्यथा पतन और बर्बादी का वातावरण छा जाता है।… लोगों को गुमराह करने वाली प्रतिक्रियावादी शक्तियाँ जनता को ग़लत रास्ते पर ले जाने में सफल हो जाती हैं। इससे इन्सान की प्रगति रुक जाती है और उसमें गतिरोध आ जाता ह…

नौकरियां कहां है, नौजवान कहां हैं, क्रांति फिल्म का वो गाना कहां हैं

नौकरियां कहां है, नौजवान कहां हैं, क्रांति फिल्म का वो गाना कहां हैं ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि सरकार पांच साल से ख़ाली पड़े पद समाप्त करने जा रही हैं। यह साफ नहीं है कि लगातार पांच साल से ख़ाली पड़े पदों की संख्या कितनी है। अवव्ल तो इन पर भर्ती होनी चाहिए थी मगर जब नौजवान हिन्दू मुस्लिम डिबेट में हिस्सा ले ही रहे हैं तो फिर चिन्ता की क्या बात। यह आत्मविश्वास ही है कि जिस समय रोज़गार बहस का मुद्दा बना हुआ है उस समय यह ख़बर आई है। वित्त मंत्रालय ने 16 जनवरी को अलग अलग मंत्रालयों और विभागों को ऐसे निर्देश भेज दिए हैं। विभाग प्रमुखों से कहा गया है कि ऐसे पदों की पहचान करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपे। इस ख़बर में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं का दिल धड़का दिया है। अब ये नौजवान क्या करेंगे, कोई इनकी क्यों नहीं सुनता, इन नौजवानों ने आख़िर क्या ग़लती कर दी ? बहुत सी परीक्षाएं हो चुकी हैं मगर ज्वाइनिंग नहीं हो रही है। 30 जनवरी को यूपी में तीन तीन भर्तियां रद्द हो गईं। लड़के उदास मायूस हैं। रो रहे हैं। उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। जिस 16 जनवरी को वित्त मंत्रालय ने तमाम विभागों को निर्देश दिए…

रोज़गार के आंकडों का जश्न झूठ और फ्राड है

रोज़गार के आंकडों का जश्न झूठ और फ्राड है जो लोग पाँच से सात करोड़ रोज़गार पैदा करने का दावा कर रहे थे वो छह लाख प्रतिमाह नौकरियां पैदा करने पर जश्न मना रहे हैं। IIM B के अध्ययन का हवाला देकर ट्विटर पर डाँस कर रहे हैं। जबकि इस स्टडी के पैमाने पर महेश व्यास पहले भी सवाल उठा चुके हैं। इतना ही है तो सरकार में जो हैं वो नौकरियों के पता चलने का सिस्टम बना दें। दूसरे की स्टडी उठा कर मंत्री और प्रवक्ता लोग ट्विट करना बंद करें । पांच करोड़ रोज़गार मतलब महीने में चालीस लाख से अधिक रोज़गार। सात करोड़ के हिसाब से तो और भी ज़्यादा हो जाता है। सरकार ने इस झूठ का दावा किया और डरपोक मीडिया ने छाप दिया। वैसे मुद्रा लोन के नाम पर किए जा रहे इस झूठे दावे को भी एक्सपोज़ किया जा चुका है। आप ख़ुद भी गूगल सर्च कर सकते हैं। अपना चालीस लाख प्रतिमाह रोज़गार पैदा करने का झूठ भूल कर अब ये छह लाख प्रति माह रोज़गार पैदा करने के झूठ का ट्विटर पर जश्न मना रहे हैं। आप को थोड़ा भी गणित आता हो तो इस खेल पर पाँव पटकने लग जाएँगे। जिस IIM B के अध्ययन पर लोग नाच रहे हैं उसके हिसाब से भी संगठित क्षेत्र छह लाख प्रति माह रो…

समाज की सेवा करने का अवसर हमें अपना ऋण चुकाने का मौका देता है - नरेन्द्र मोदी

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कड़ी मेहनत कभी थकान नहीं लाती , वह संतोष लाती है

माय रंग दे मेरा रंग दे बसंती चोला.....

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