Posts

Showing posts from February 12, 2015

हिन्दु एकत्ता है अगर तो भारत महाशक्ति के दिन दुर नही

हमने खुद अपनों को नीचा कहकर के ठुकराया है |
हार के रूप में हमने अपनी गलती का फल पाया है ||

गैरों का ये दल न किसी भी आसमान से आया है |
पाप हमारा बनकर के आतंक हमीं पर छाया है ||

भूल पुरानी दुःखदायी है अब तो चलो सुधार करें |
बिछड़ गये जो भाई उनको गले लगाकर प्यार करें ||

वरना ये कांसी माया अंग्रेजों से भी भारी होंगे |
फूट डालकर जिनने अपना देश गुलाम बनाया था ||

में बोलूंगा गीत ये मैंने बार बार दोहराया था |
तुम मत कहना कवियों ने अपना धर्म नही निभाया था ||

हस्ती न मिट सकी हमारी दुश्मन था जग सदियों से |
गाकर मत भूलो जाकर पूछो पंजाबी नदियों से ||

कहॉ गया कंधार कहॉ ननकाना साहिब प्यारा है |
दूर हुआ गंगा से उसका सप्त सिंधुजल न्यारा है ||

कश्मीर कैलाश गया और हस्ती मिटती आई है |
दिग्विजयी भारत की सीमा सदा सिमटती आई है ||

कहॉ गया वो तक्षशिला का गुरूकुल जिसने दुनिया को |
ज्ञान कला विज्ञान नीति का पहला पाठ पढ़ाया था ||

में बोलूंगा गीत ये मैंने बार बार दोहराया था |
तुम मत कहना कवियों ने अपना धर्म नही निभाया था ||

दुश्मन की ताकत से ज्यादा ताकत सदा हमारी थी |
चंद दुश्मनों फिर भी कर ली हम पर सरदारी थी ||

वह खून कहो किस मतलब का

वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें उबाल का नाम नहीं।
वह खून कहो किस मतलब का
आ सके देश के काम नहीं ।

वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें जीवन, न रवानी है ।
जो परवश होकर बहता है,
वह खून नहीं, पानी है ।

उस दिन लोगों ने सही-सही
खून की कीमत पहचानी थी ।
जिस दिन सुभाष ने बर्मा में
मॉंगी उनसे कुरबानी थी ।

बोले, "स्वतंत्रता की खातिर
बलिदान तुम्हें करना होगा ।
तुम बहुत जी चुके जग में,
लेकिन आगे मरना होगा ।

अमेरिकी बहनों और भाइयों

आपके इस स्नेह्पूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय आपार हर्ष से भर गया है.मैं आपको दुनिया के सबसे पौराणिक भिक्षुओं कि तरफ से धन्यवाद् देता हूँ.; मैं आपको सभी धर्मों की जननी कि तरफ से धन्यवाद् देता हूँ , और मैं आपको सभी जाति-संप्रदाय के लाखों-करोड़ों हिन्दुओं कि तरफ से धन्यवाद् देता हूँ.मेरा धन्यवाद् उन वक्ताओं को भी जिन्होंने ने इस मंच से  यह कहा है कि दुनिया में शहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से  फैला  है . मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूँ जिसने दुनिया को शहनशीलता और  सार्वभौमिक स्वीकृति (universal acceptance) का पाठ पढाया है.हम सिर्फ  सार्वभौमिक शहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूँ  जिसने इस धरती के सभी देशों के  सताए गए लोगों को शरण दी है.मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय में उन  इस्राइलियों के शुद्धतम स्मृतियाँ बचा कर रख्हीं हैं, जिनके मंदिरों को रोमनों ने तोड़-तोड़ कर खँडहर बना दिया, और तब उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली.  मुझे इस बात का…